"'भगवा' शर्मसार है "

'भगवा' क्या है? उसकी अहमियत क्या है? उसका गुरुर क्या है? उसका मूल्य क्या है ? आज ये सारे प्रश्न पूछना जरूरी हो गया है । इन सभी को प्रश्नों का मैं अपनी समझ से उत्तर देने की कोशिश करूंगा।।

भगवा त्याग का प्रतीक है ।
भगवा समर्पण का प्रतीक है
भगवा तेज का प्रतीक है ।
भगवा ओज का प्रतीक है।
भगवा कुरुक्षेत्र में धर्म का प्रतीक है ।
भगवा धनानंद के कुशासन के अंत का प्रतीक है।
भगवा अशोक के शांति संदेश प्रतीक है ।
भगवा राम के मर्यादा का प्रतीक है ।
भगवा सीता के सतीत्व का प्रतीक है।
भगवा यज्ञ के ज्वाला का प्रतीक है।
भगवा शांति का प्रतीक है।
भगवा भारत के संस्कृति का प्रतीक है।।

भगवा के कई और विशेषण हैं
आप सब ये जरूर सोच रहे होंगे कि मैं ये सब क्यों लिख रहा हूँ । ऐसा क्या हो गया जो मुझे आज भगवा की विवेचना करनी पड़ रही है । आज की एक घटना के कारण ये जरूरी हो गया है कि लोग जाने की भगवा किसी के घर की जागीर नही है कि उसे जैसे चाहें प्रयोग कर लें ।।
आज राजस्थान के एक न्यायलय परिसर में एक हत्यारे के समर्थन में भगवा लहराया गया । अपने भगवा की ऐसी दुर्दशा देखकर मन विचलित हो उठा , आंसू छलक गये । आज हमारे गुरुर को धक्का लगा की एक हत्यारे, पापी, राक्षस  के लिए भगवा उठेगा, क्या यही दिन देखना बाकी रह गया था भगवा को।
क्या भगवा किसी क्रूर कत्ल और कातिल का परिचायक हो सकता है । जो कृष्ण को छाया दे वो किसी अधर्मी के लिए उठेगा।। आज मैं ये पूछता हूँ कि कोई कैसे किसी की हत्या का , मौत का जश्न मना सकता है और वो भी भगवा को आगे रखकर।।
क्या आज भगवाधरीयों का ये दायित्व नहीं बनता है कि वे आगे आएं और भगवा को ऐसे अपमान से , ऐसे कुकृत्य से दूर करें ।। या आप आज इसे सही मान रहे हैं । अगर  ऐसा है तो मत भूलिए की कुरु के वंशज दुर्योधन और युधिष्ठिर दोनो थे लेकिन भगवा ने साथ तो धर्म का ही दिया।
अगर आज आप इसका विरोध नही करते हैं , आपका आज अगर खून नही खौलता है तो आप भगवा के सेवक नही है। आप सत्ता के नशे में चूर हैं , आप पाखंडी हैं और आज आपके आंखों के सामने एक चश्मा लग गया है जो आपको इंसान और हैवान में फर्क नही समझने दे रहा है।। आपको इससे बचना होगा और भगवा को भी बचाना होगा ।।
आप ऐसे हत्यारे को भगवा की चादर में कैसे रवहन दे सकते है । सोचिये क्या ये प्रश्न नही उठेगा की क्या भारत की संस्कृति यही है जो ऐसे घिनोने हरकत करने  वाले को भी पनाह देती है।
आज भारत और भगवा दोनो के इज्जत का सवाल है , आप इसे हल्के में नही जाने दे सकते है ।। आपको इसे रोकना होगा ।। और मैं आज आह्वान करता हूँ सभी भगवा प्रेमियों से की इज्जत से खिलावाड़ होने से इसे बचाइए।। इसे शर्मसार होने से बचाइए।। इसके गौरव को यूं मिट्टी में न मिल जाने दीजिये ।।

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