सेना से संवेदना
आज बहुत दिनों बाद मैं इस ब्लॉग पर लौट रहा हूँ । बहुत सोचने के बाद मेरे ख्याल में एक मुद्दा है जिसपर बात करना , विचार करना मेरे हिसाब से बहुत जरुरी है और शायद इसलिए मैंने फिर से ब्लॉग के माध्यम को चुना है। अपनी बात शुरू करने से पहले में उस व्यक्ति का धन्यववाद करना चाहता हूँ जिन्होंने मुझे फिर से प्रेरित किया की मैं फिर लिखना शुरू करूँ । अब आते हैं आज के विषय पर , आज मैंने जो विषय चुना है वो आजकल के समचारों का मुख्य पहलु है । कभी भी दो ही मुद्दे हैं जिनपर सबसे ज्यादा बाते होती है ; १) राजनीति और २) सेना । मजे की बात ये है की ये दोनों आपस में जुड़े हुए हैं । हम सब को दुःख होता है जब एक जवान को बिना किसी कारण के आपने जान से हाथ धोना पड़ता है । वो जो ठण्ड में, गर्मी में , बरसात में हर वक़्त देश की रक्षा के लिए तत्पर रहता है और उसे जान गंवाना पड़ता है ।हम सब चाहते है जो सैनिक बेफजूल कारणों से जान गंवाता है उसके एक एक खू...